हाइड्रोपोनिक खेती करने का तरीका और आवश्यक पोषक तत्व (Nutrients)

*हाइड्रोपोनिक खेती करने का तरीका और आवश्यक पोषक तत्व (Nutrients)*

नमस्ते! हाइड्रोपोनिक खेती मिट्टी के बिना पानी में पोषक तत्वों के घोल का उपयोग करके पौधे उगाने की एक आधुनिक विधि है। यहाँ पूरी प्रक्रिया और आवश्यक जानकारी हिंदी में दी गई है।

• हाइड्रोपोनिक्स के मुख्य प्रकार (तरीके)

1. डीप वाटर कल्चर (DWC): पौधों की जड़ें सीधे पोषक घोल में डूबी रहती हैं और एयर पंप से ऑक्सीजन दी जाती है।
2. न्यूट्रिएंट फिल्म तकनीक (NFT): पौधों की जड़ों के नीचे से पोषक घोल की एक पतली परत बहती रहती है।
3. विक सिस्टम: बत्ती (विक) के जरिए पोषक घोल पौधों तक पहुँचता है।
4. एरोपोनिक्स: जड़ों को हवा में लटकाकर उन पर पोषक घोल का छिड़काव किया जाता है।

• शुरुआत के लिए सामग्री:

· ग्रो ट्रे या कंटेनर
· पानी की टंकी (रिज़र्वायर)
· वाटर पंप और एयर पंप
· ग्रोइंग माध्यम (कोकोपीट, रॉकवूल, पर्लाइट)
· pH किट और TDS मीटर
· पोषक घोल (Nutrient Solution)


° कौन-कौन सी "दवा" (पोषक तत्व) लगेंगे?

हाइड्रोपोनिक्स में "दवा" का मतलब है पोषक घोल। इसमें मैक्रोन्यूट्रिएंट्स और माइक्रोन्यूट्रिएंट्स शामिल होते हैं:

1. मैक्रोन्यूट्रिएंट्स (प्रमुख तत्व):
   · नाइट्रोजन (N): पत्तियों की वृद्धि के लिए।
   · फॉस्फोरस (P): जड़ों, फूलों और फलों के लिए।
   · पोटैशियम (K): पौधे की समग्र स्वास्थ्य के लिए।
2. माइक्रोन्यूट्रिएंट्स (गौण तत्व):
   · कैल्शियम, मैग्नीशियम, लोहा, जिंक, तांबा, बोरॉन आदि।

• बाजार में उपलब्ध प्रमुख ब्रांड:

· जनरल हाइड्रोपोनिक्स फ्लोरा सीरीज (3-बोतलें)
· मास्टरब्लेंड
· एडवांस्ड न्यूट्रिएंट्स
· (स्थानीय नर्सरी या ऑनलाइन उपलब्ध)

•पोषक घोल तैयार करने का सही तरीका:

1. टंकी में साफ पानी (RO पानी बेहतर) भरें।
2. पहले माइक्रो (Part B) डालें और अच्छे से मिलाएँ।
3. फिर ग्रो (Part A) डालें और मिलाएँ।
4. अंत में ब्लूम (Part C) डालें और मिलाएँ।

•जनरल हाइड्रोपोनिक्स फ्लोरा सीरीज के लिए मात्रा (प्रति लीटर पानी):

पौधे का प्रकार / अवस्था फ्लोरा माइक्रो (Part B) फ्लोरा ग्रो (Part A) फ्लोरा ब्लूम (Part C)
शुरुआती अवस्था (अंकुर) 0.5 ml 0.5 ml 0.25 ml
हरी पत्तेदार सब्जियाँ 1.5 ml 2.0 ml 1.0 ml
फलदार पौधे (टमाटर, मिर्च) 2.0 ml 1.0 ml 3.0 ml
सामान्य उपयोग 2.0 ml 2.0 ml 2.0 ml

TDS/EC मान के अनुसार:

· अंकुर: TDS 400-600 ppm (EC 0.8-1.2)
· पत्तेदार सब्जियाँ: TDS 800-1000 ppm (EC 1.6-2.0)
· फलदार पौधे: TDS 1400-1800 ppm (EC 2.8-3.6)

•pH लेवल का प्रबंधन

· आदर्श pH रेंज: 5.5 से 6.5 के बीच।
· pH चेक करें: pH मीटर या टेस्ट स्ट्रिप्स से।
· pH कम करने के लिए: pH Down (फॉस्फोरिक एसिड) की 1-2 बूँदें डालें।
· pH बढ़ाने के लिए: pH Up (पोटैशियम हाइड्रॉक्साइड) की 1-2 बूँदें डालें।

•महत्वपूर्ण सुझाव

1. पानी का तापमान: 18°C - 22°C के बीच रखें।
2. रोशनी: प्रतिदिन 12-16 घंटे की रोशनी (प्राकृतिक या ग्रो लाइट)।
3. घोल बदलें: हर 2-3 सप्ताह में पोषक घोल बदल दें।
4. शैवाल से बचाव: टंकी को प्रकाश से ढक कर रखें।

शुरुआत के लिए: एक छोटे DWC सिस्टम से शुरू करें और पत्तेदार सब्जियाँ (जैसे पालक, लेट्यूस) उगाएँ।

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